भारत में बढ़ती बेरोजगारी का कारण आ गया सामने

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बेरोजगारी की अगर बात करें तो यह पूरे भारत के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। जिसको देखो वही इस समस्या से जूझ रहा है। अहम बात तो यह है कि सरकार भी इस समस्या पर काबू पाने में असहज है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर वो अहम कारण क्या है जिससे यह समस्या खत्म होने का नाम तक नहीं ले रही और हर दिन बढ़ रही है।

अगर आप भी अब तक इस बात से अंजान है कि देश में बेरोजगारी कि समस्या इतनी बढ़ क्यों रही है, क्यों लोग बेरोजगारी से परेशान हैं। तो यहां पर आज हम आपसे कुछ इसी सिलसिले पर चर्चा करने वाले हैं यहां पर हम जानेगें कि आखिर देश में बेरोजगारी दिन पर दिन अपने पैर क्यों पसार रही है?

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बेरोजगारी का प्रमुख कारण भ्रष्टाचार

The main cause of unemployment is corruption
The main cause of unemployment is corruption

देश में जहां लोग एक तरफ आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं वहीं दूसरी ओर अपराधिक गतिविधियां भी निरंतर बढ़ रही हैं।

लोग अपराध हिंसा के साथ ही बेरोजगारी और आर्थिक एवं राजनीतिक भ्रष्टाचार जैसे मुद्दें से परेशान हैं।

एक सर्वे का विषय ‘विश्व को क्या करता है परेशान?’ पर इप्सोस के सर्वे से पता चलता है,

कि देश के 44 प्रतिशत लोग बेरोजगारी तथा वित्तीय एवं राजनीतिक भ्रष्टाचार से परेशान हैं।

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अपराध एवं हिंसा भी है प्रमुख कारण

समाज में भ्रष्टाचार या फिर बेरोजगारी ही अहम मुद्दा नहीं है बल्कि अपराध एवं हिंसा भी,

भारतीयों को परेशान करने का प्रमुख कारण माना गया है। सर्वेक्षण के अनुसार करीब 33 प्रतिशत,

लोग अपराध एवं हिंसा से परेशान होते हैं। वहीं दूसरी ओर 31 प्रतिशत लोग गरीबी,

और सामाजिक असमानता को प्रमुख मुद्दा मानते हैं। 21 प्रतिशत भारतीय आतंकवाद को प्रमुख मुद्दा मानते हैं।

ऐसे ही 19 प्रतिशत शिक्षा, 16 प्रतिशत पर्यावरण नुकसान, 15 प्रतिशत पर्यावरण परिवर्तन,

14 प्रतिशत करों से, 13 प्रतिशत मंहगाई और 11 प्रतिशत नैतिकता एवं 10 प्रतिशत भारतीय परेशान हैं।

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इन लोगो ने मन देश का नेतृत्व सही दिशा में

इस सर्वेक्षण में 67 प्रतिशत लोगों ने यह माना है कि देश का नेतृत्व सही दिशा में जा रहा है। इस आधार पर सबसे अधिक 92 प्रतिशत चीन के लोगों ने अपने देश की दिशा को सही माना है। इसके बाद 78 प्रतिशत के साथ सऊदी अरब दूसरे, 67 प्रतिशत के साथ भारत तीसरे तथा 65 प्रतिशत के साथ मलेशिया चौथे स्थान पर है। इप्सोस का यह सर्वेक्षण एक मासिक सर्वेक्षण है। इसे 28 देशों में किया जाता है तथा 65 साल की उम्र तक के लोग इसमें भाग लेते हैं।

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Ramgovind kabiriya
Ramgovind kabiriya
मैं रामगोविन्द कबीरिया मुझे लिखने का काफी शौक है, मैं कन्टेन्ट राइटिंग में पिछले तीन सालों से काम कर रहा हूॅं। मैंने इन्दौर के डीएवीवी यूनिवर्सटी से एम.ए. मासकम्युनिकेशन किया है। इसके अलावा मैंने कम्प्युटर के क्षेत्र से सम्बधित पीजीडीसीए भी किया है। मैं न्यूज़, फैशन, धर्म, लाईफस्टाइल, वायरल स्पाॅर्टस आदि सभी कैटेगिरी में लिखता हूॅं।

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