basant panchami puja vidhi

बसंत पंचमी पर पाना चाहते मां सरस्वती का आशीर्वाद तो ऐसे करें पूजा

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मौसम ठंड का चल रहा है। हर जगह हरियाली ही हरियाली नजर आती है। क्योंकि माघ महीने की पंचमी तिथि से ऋतुराज बसंत का आगमन होता है। basant panchami puja vidhi यह वह समय होता है जब मानव के साथ पशु-पक्षी भी हर्ष उल्लास से परिपक्व रहते हैं।

अंग्रेजी माह के फरवरी महीने में आने वाली बसंत पंचमी पर्व हर भारतीय के जनजीवन को अनेकों तरह से प्रभावित करती है। बसंत पंचमी का पर्व इसलिए मनाया जाता है क्योंकि प्राचीन समय से ही माना जाता है कि इस दिन ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था।

इसलिए इस दिन मां शारदे की पूजा कर सभी अधिक से अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं।

इसलिए मनाते हैं बसंत पंचमी

So celebrate Basant Panchami
So celebrate Basant Panchami

जैसा की हमने पहले ही बताया है कि मां सरस्वती के जन्मदिन के उपलक्ष्य में बसंत पंचमी मनाया जाता है।

प्राचीन काल से ही लोगो की माने तो सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु से अनुमति लेकर।

basant panchami puja vidhi

ब्रम्हा ने अपने कमंडल से जल छिड़का जिससे वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का उदय हुआ,

जो मां सरस्वती के रूप में उनकी पुत्री कहलाईं।

ऐसे करें basant panchami puja vidhi

Do such worship on Basant Panchami
Do such worship on Basant Panchami

बसंत पंचमी पर अगर आप वकई में मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं।

तो उसके लिए जरूरी है कि आप उनकी basant panchami puja vidhi पूजा विधि के बारे मेें अच्छे से जान लें।

तो चलिए जानते हैं कि कैसे मां सरस्वती की पूजा करनी चाहिए।

सबसे पहले तो बसंत पंचमी में प्रातः उठकर बेसन युक्त तेल का शरीर पर उबटन करके स्नान करना चाहिए।

इसके बाद स्वच्छ पीतांबर या पीले वस्त्र धारण कर मां सरस्वती के पूजन की तैयारी भी करना चाहिए।

माघ शुक्ल पूर्वविध्दा पंचमी को उत्तम वेदी पर वस्त्र बिछाकर चावल से अष्टदल कमल बनाएं।

बसंत पंचमी पर कलश की स्थापना करें

अग्रभाग में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा को स्थापित करें। तद्पश्चात पृष्ठभाग में बसंत,

जौ व गेंहू की बाली के पुंज को जल से भरे कलश की स्थापना करें। सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें।

बसंत पुंज के द्वारा रति और कामदेव का पूजन करें। सामान्य हवन करने के बाद केशर या,

हल्दी मिश्रित हलवे की आहुतियां दें। इस दिन विष्णु-पूजन भी करना चाहिए।

कलश की स्थापना करके गणेश, सूर्य, विष्णु तथा महादेव जी की पूजा करने के बाद वीणावादिनी मां सरस्वती जी की पूजा करना चाहिए।

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Author Profile

Ramgovind kabiriya
Ramgovind kabiriya
मैं रामगोविन्द कबीरिया मुझे लिखने का काफी शौक है, मैं कन्टेन्ट राइटिंग में पिछले तीन सालों से काम कर रहा हूॅं। मैंने इन्दौर के डीएवीवी यूनिवर्सटी से एम.ए. मासकम्युनिकेशन किया है। इसके अलावा मैंने कम्प्युटर के क्षेत्र से सम्बधित पीजीडीसीए भी किया है। मैं न्यूज़, फैशन, धर्म, लाईफस्टाइल, वायरल स्पाॅर्टस आदि सभी कैटेगिरी में लिखता हूॅं।

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