कामिका एकादशी 2018: इस ख़ास पर्व पर करें ये खास तरह से पूजा मिट जाएंगे सारे संकट

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यह तो सभी जानते हैं कि सावन लग चुका है। और इसे भगवान शिव का पवित्र मास माना जाता है। इस समय हर जगह भगवान शिव के ही जयकारे लगाए जाते हैं। लेकिन शायद आप यह भूल रहे हैं कि शिवजी के प्रिय सावन में श्री कृष्ण की पूजा का उत्सव है।

सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष कामिका एकादशी 7 अगस्त 2018 को पड़ रही है। इस दिन व्रत उपवास करके भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया जाता है। यह हिन्दु साम्प्रदाय का बहुत ही खास पर्व माना जाता है। चलिए जानते हैं इस व्रत के बारे में विस्तार से।

ऐसे की जाती है कामिका एकादशी पर पूजा

This is done on worship at Kamika Ekadashi.
This is done on worship at Kamika Ekadashi.

कामिका एकादशी के दिन व्रत उपवास करके भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया जाता है।

इस दिन प्रातः काल उठ कर भगवान श्री कृष्ण को जल चढ़ायें और उन्हें तुलसी दाल और मंजरी अर्पित करें।

भगवान के सामने घी का दीपक प्रज्वलित करें। भगवान को पंचामृत से स्नान करायें और धूप, दीप, चंदन आदि,

सुंगधित पदार्थों से उनकी आरती उतारें। जब पूजा हो जाए तो,

इसकी कथा को सुनें और उसके बाद पूरे दिन फलाहार करके व्रत करें।

इस मुहूर्त में करें पूजा मिलेगा लाभ

दशमी के दिन से ही सूर्यास्त के पहले भोजन करने के बाद कुछ भी नहीं खाना चाहिए,

और कामिका एकादशी के व्रत का संकल्‍प मन में ले लेना चाहिए। अगले दिन प्रात: काल उठकर भगवान की पूजा करनी चाहिए और व्रत का करते हुए एकादशी की रात को जागरण करना चाहिए। एकादशी के दिन जागरण करना भी व्रत का ही एक अंग माना जाता है। इस बार व्रत शुभ मुहूर्त 7 अगस्‍त को सुबह 7:52 बजे शुरू होगा और 8 अगस्त को प्रात 05:15 बजे पर समाप्‍त होगा। अत: व्रती इसका पारण अगले दिन 8 तारीख को सुबह से लेकर 04.23 तक कर सकते हैं।

कामिका एकादशी की पौराणिक कथा

पौरणिक कथाओं के अनुसार एक बार युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि हे प्रभु श्रावण के कृष्ण पक्ष में कामिका एकादशी अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण मानी जाती है ऐसा क्‍यों, इसकी कथा का वर्णन करने की कृपा करें। तब श्री कृष्ण ने उन्‍हें ये कथा सुनाई। एक नगर में एक श्रेष्‍ठ ठाकुर और एक ब्राह्मण रहते थे। दोनों की एक दूसरे से बनती नहीं थी। आपसी झगड़े के कारण ठाकुर ने ब्राह्मण को मार डाला। बाद में जब उसने ब्राह्मण की तेरहवीं करनी चाही तो नाराज ब्राह्मणों ने उसके घर खाना खाने से मना कर दिया और ठाकुर अकेला पड़ गया। उसके मन में अपने कृत्‍य के लिए ग्‍लानि भी पैदा हुई और वह खुद को दोषी मानने लगा।

इसीलिए कामिका एकादशी का व्रत किया जाता है

तब उसने एक साधु से अपने पापों का निवारण करने का तरीका पूछा, तब साधु ने उसे कमिका एकदशी का उपवास करने के लिए कहा। उसकी सलाह पर ठाकुर ने व्रत करना शुरू कर दिया। एक बार कामिका एकादशी के दिन जब वह भगवान की मूर्ति के निकट सो रहा था तो उसने एक स्‍वप्‍न देखा। भगवान ने उसे सपने में कहा कि ठाकुर तुम्‍हारे सभी पाप दूर हो गए हैं और अब तुम ब्राह्मण हत्‍या के अपराध से मुक्त हो गए हो। तभी से कामिका एकादशी को महत्वपूर्ण माना जाता है। ये पाप को नष्‍ट करके चेतना से सभी नकारात्मकता को नष्ट कर देता है। इसीलिए आज तक श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी का व्रत किया जाता है।

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Ramgovind kabiriya
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मैं रामगोविन्द कबीरिया मुझे लिखने का काफी शौक है, मैं कन्टेन्ट राइटिंग में पिछले तीन सालों से काम कर रहा हूॅं। मैंने इन्दौर के डीएवीवी यूनिवर्सटी से एम.ए. मासकम्युनिकेशन किया है। इसके अलावा मैंने कम्प्युटर के क्षेत्र से सम्बधित पीजीडीसीए भी किया है। मैं न्यूज़, फैशन, धर्म, लाईफस्टाइल, वायरल स्पाॅर्टस आदि सभी कैटेगिरी में लिखता हूॅं।

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