इस कारण लेना पड़ा था भगवान गणेश को नारद जी से सहायता

Religion
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भगवान गणेश के विषय में तो आप सभी जानते ही होंगें उन्हें विनायक,

विघ्नहर्ता, एकदन्त आदि कई नामों से जाना जाता है.

सभी की दुविधाओं को दूर करने वाले भगवान गणेश को भी एक बार नारद जी से सहायता लेना पड़ा था

इसका क्या कारण है आइये जानते है.

माता लक्ष्मी के विवाह का आयोजन

Organizing the marriage of Mata Lakshmi
Organizing the marriage of Mata Lakshmi

एक कथा के अनुसार स्वर्गलोक में भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी के विवाह का आयोजन किया गया,

जिसके कारण सभी देवी देवता बहुत आनंदित थे. सभी देव विवाह की व्यवस्था करने में व आमंत्रण के कार्य में व्यस्त थे.

सभी देवता के मन में विचार आया की वह इस विवाह के माध्यम से माता लक्ष्मी को प्रभावित करने के लिए हर प्रयास करेंगे.

इसके लिए उन्होंने भगवान विष्णु की बरात को बहुत धूम-धाम से कुन्दनपुर ले जाने का मन बनाया.

भगवान गणेश को सभी करते थे नापसंद 

Lord Ganesh dislike all
Lord Ganesh dislike all

इसकी चर्चा के लिए सभी भगवान विष्णु के घर पर एकत्र हुए उस समय सभी की नजर भगवान गणेश पर थी.

वह भी सभी के साथ भगवान विष्णु के घर पर उपस्थित थे कोई भी ये नहीं चाहता था.

की भगवान गणेश विष्णु जी की बारात शामिल हों.

उनके अजीब अकार व अधिक भोजन करने की वजह से कोई भी उन्हें बरात में ले जाना नै चाहता था.

स्वर्गलोक की रक्षा का सवाल

Lord Ganesh had to wait for the protection of heaven
Lord Ganesh had to wait for the protection of heaven

तब सभी देवताओं में भगवान विष्णु से कहा की आप भगवान गणेश को स्वर्गलोक की रक्षा के लिए यहीं रुकने के लिए कहें

यह बात सुनकर भगवान विष्णु को बहुत बुरा लगा लेकिन देवताओं की जिद की वजह से,

उन्होंने भगवान गणेश को स्वर्ग में रहने के लिए राजी कर लिया.

नारद जी का आगमन हुआ 

Narada ji arrived with Lord Ganesha
Narada ji arrived with Lord Ganesha

भगवान गणेश के स्वर्ग में रुकने पर नारद जी वहां उपस्थित हुए

व भगवान गणेश के बरात में शामिल न होने सारी बातें जानकार उन्होंने भगवान गणेश को एक उपाय सुझाया

जिसके अनुसार जिस रास्ते से बरात प्रस्थान करने वाली थी अपने वाहन मूषक के माध्यम से उस मार्ग को खोदना था.

भगवान गणेश ने मूषक को दिया आदेश 
Lord Ganesha ordered the mouse
Lord Ganesha ordered the mouse

भगवान गणेश ने नारद जी की बात को मानकर ऐसा ही किया उन्होंने मूषक को बरात वाला मार्ग खोदने का आदेश दिया.

जिससे मूषक ने अपने साथियों के साथ उस मार्ग को खोद दिया. जब बरात उस मार्ग से निकली तो,

आगे जाकर भगवान विष्णु के रथ का एक पहिया भूमि में जाकर धंस गया.

देवताओं के बहुत कोशिश करने के बाद भी वह बाहर नहीं निकला.

एक किसान पास ही खड़ा सब देख रहा था उसने सोचा क्यों न में भी इनकी कुछ सहायता कर दूं

इस उद्देश्य से वह रथ का पहिया निकालने के लिए वहां गया. उसने देवताओं से कहा की,

वह उस पहिये को निकाल सकता है. उसकी यह बात सुनकर सभी देवता मन में सोचने लगे,

की हम देव होकर इस पहिये को नहीं निकाल पाऐ तो यह साधारण किसान इसे भला कैसे निकालेगा.

तब किसान ने उस पहिये को अपने हांथों में पकड़ा व भगवान गणेश का नाम लेकर उसे एक झटके में बहार निकाल दिया.

सभी ये देखकर हैरान हो गए. तब एक देता ने उस किसान से पूंछा की उसने भगवान गणेश का नाम क्यों लिया

तो किसान ने उत्तर दिया की भगवान गणेश सभी की दुविधाओं को दूर करते है

यदि कोई भी कार्य उनका नाम लेकर प्रारंभ किया जाय तो वह अवश्य पूर्ण होता है.

किसान की बात को सुनकर सभी देवताओं को अपनी गलती का एहसास हुआ

और उन्होंने भगवान गणेश से क्षमा मांगकर उन्हें भी बरात में शामिल कर लिया.

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Ramgovind kabiriya
Ramgovind kabiriya
मैं रामगोविन्द कबीरिया मुझे लिखने का काफी शौक है, मैं कन्टेन्ट राइटिंग में पिछले तीन सालों से काम कर रहा हूॅं। मैंने इन्दौर के डीएवीवी यूनिवर्सटी से एम.ए. मासकम्युनिकेशन किया है। इसके अलावा मैंने कम्प्युटर के क्षेत्र से सम्बधित पीजीडीसीए भी किया है। मैं न्यूज़, फैशन, धर्म, लाईफस्टाइल, वायरल स्पाॅर्टस आदि सभी कैटेगिरी में लिखता हूॅं।

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