ज्वाला माता के नाम को प्रामाणिक करता देवी का यह मंदिर

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भारत में असंख्य मंदिर है। कुछ मंदिरो के बारे में, तो हम जानते है। शायद कुछ के बारे में नहीं भी। लोगो में भी इनके बारे में जिज्ञासा तब बड़ जाती है। जब इनसे जुड़ा कोई इतिहास या पौराणिक कथा हो। ऐसे में आज हम आपको ज्वला देवी मंदिर jwala devi mandir के बारे में बताएँगे।

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jwala devi mandir

यह मंदिर किस वजह से लोगो को ज्यादा याद रहता है तथा इससे जुडी कौनसी मान्यता है? जो लोगो का ध्यान अपनी और आकर्षित करती है:

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कहाँ है ज्वाला देवी मंदिर

यह ज्वला देवी का मंदिर भारत के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधार पहाड़ी के बीच बसा हुआ है।

भारत में मौजूद 51 शक्ति पीठो में इसकी गिनती होती है।

आपको बता दे, शक्ति पीठ उन जगहों को बोला जाता है।

जहाँ माता सती के अंग गिरे थे।

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What reason behind the burning of flame at Jwala ji temple
What reason behind the burning of flame at Jwala ji temple

शास्त्रों के अनुसार शक्ति पीठ का मतलब

ज्वला देवी के इस स्थान पर सती की जीभ गिरी थी।

मान्यता यह भी है कि सभी शक्ति पीठो में भगवान और देवी शिव के साथ निवास करते है।

यहाँ माता की आराधना और पूजा करने से माता जल्दी प्रसन्न हो जाती है।

यह मंदिर ज्योता वाली का मंदिर और नगरकोट के नाम से भी जाना जाता है।

ज्वला देवी मंदिर की चोटी पर सोने की परत चढ़ी हुई है।

gold gumbad wale jwala mata ji mandir ka photo
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कैसे है ज्वला देवी का रूप

jwala devi mandir ज्वला देवी मंदिर में कई सदियों से।

बिना तेल की बत्ती प्राकृतिक रूप से नो ज्वालायें जल रही।

इन नौ ज्वालाओ में प्रमुख ज्वला जो चाँदी के दिए में जल रही है।

वह महाकाली कही जाती है।

बाकि आठ ज्वालाओ के रूप को माता अनंपुर्णा, चंडी, हिंगलाज, विध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजी देवी ज्वला देवी मंदिर में निवास करती है।

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ज्वला माता में हमेशा ज्वला जलने का कारण

दरसल, इस कारण आपको जानने के लिए एक पौराणिक कथा को जानना पड़ेगा।

प्राचीन कल में गोरखनाथ नाम का व्यक्ति माता के प्रिय भक्तो मे से एक था।

जो रोजाना माता की दिल से सेवा किया करता था। एक बार जब गोरखनाथ को भूख लगी। तो उसने माता से कहा कि वह आग जलाकर पानी गर्म करे। वह भिक्षा लेने जा रहा है।

मां ने अपने भक्त के कहे अनुसार आग जलाकर पानी गरम किया और वह गोरखनाथ के इंतजार करने लगी। लेकिन गोरखनाथ अभी तक नहीं आया। जिस कारण से मां आज भी ज्वला जलाकर अपने भक्त का इंतजार कर रही है। ऐसा बताया जाता है कि जब कलयुग खत्म होकर फिर सतयुग आएगा। तो गोरखनाथ लौटकर माता के पास वापस आएगा। तब तक यह ज्वला ऐसे ही जलती रहेगी। इस अग्नि को ना ही घी और ना ही तेल की आवश्यकता है।

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गोरख डिब्बी क्या है

माता ज्वला देवी शक्ति पाठ में मां के अलावा और अन्य चमत्कार भी देखने को मिलते है। जिसमे गोरख डिब्बी प्रमुख है। यह मंदिर परिसर में ही मौजूद है। मंदिर के पास एक जगह पर यह स्थित है। इसे देखने पर आपको कुंड में से पानी गर्म होता दिखाई देगा। लेकिन जब आप पानी को छूते है। तो यह पानी ठंडा लगने लगता है।

akbar known jwla devi temple
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अकबर ने माना मां का चमत्कार

यह घटना अकबर के समय की है। जब ध्यानभक्त नाम का व्यक्ति माँ जोतावाली का परम भक्त था। जिसे मां पर पूरी आस्था थी। एक बार वह अपने गांव से अन्य भक्तो के साथ माता रानी के दर्शन के लिए निकला। रास्ते में मुग़ल सेना के लोगो ने उन्हें पकड़ लिया और दरबार में पेश किया। अकबर ने ध्यानभक्त से पूछा कि वह इतने लोगो के साथ कहाँ जा रहा है? उसने कहा कि वह जोतावाली मां के दर्शन करने जा रहा है। अकबर ने फिर पूछा कि क्या शक्ति है तेरी मां में? ध्यानभक्त बोला मां तो पुरे संसार की रक्षा कर रही है। ऐसा कोई भी कार्य नहीं जो वह ना कर सके।

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अकबर ध्यानभक्त संवाद

jwala devi mandir इसी बात को सुनकर अकबर ने ध्यानभक्त के घोड़े का सर कलम कर दिया। व्यंग्य में अकबर बोला कि कहाँ है तेरी मां अगर वह सच्ची है। तो फिर इस मरे हुए घोड़े को जीवित करके दिखाए। ध्यानभक्त ने माता से विनती कि और मां ने भी उसकी लाज रखी। मां के आशीर्वाद से घोड़े का कटा हुआ सिर पुनः जुड़ गया। बाद में घोडा हीन-हिनाने भी लग गया। अकबर और उसकी सेना दोनी ही इस चमत्कार को देख कर चौक गए। बाद में अकबर ने मां से माफ़ी मांगी। फिर वह थोड़े अहंकार के साथ माता के दरबार में सोने का छत्र चढाने पंहुचा। अकबर ने छत्र माता के ऊपर लगाया। तो वह अचानक निचे गिर गया और धातु में बदल गया। आज भी वह छत्र इस मंदिर में मौजूद है।

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