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mata ke solah singar: मां दुर्गा के श्रृंगार की क्या है महिमा

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माता तो प्रसन्न करने के लिए लोग उपवास, गरबा और पाठ किया करते हैं. जो कहीं हद तक सही भी है, लेकिन माता को खुश करने के लिए श्रृंगार भी एक माध्यम है. माता की मूर्ति पर श्रृंगार करने से वह खुश होती हैं. आखिर mata ke solah singar मैं किन चीजों का ध्यान रखें. कौन सी ऐसी चीजें हैं, जिसके माध्यम से माता के श्रृंगार से उन्हें पसंद किया जा सकता है. तो चलिए जरा विस्तार से जानते हैं:

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mata ki chowki ko kaise sajaye
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mata ke solah singar

पुराने समय से कहा जाता है कि नवरात्रि के दौरान माता को श्रृंगार चढ़ाना बहुत ही शुभ माना जाता है.

बताया भी जाता है कि ऐसा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होने के अलावा घर में सुख और समृद्धि को लेकर के आता है.

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लेकिन इस बात में भी कोई संदेह नहीं है कि जो भी भक्त माता को सच्चे दिल से श्रृंगार अर्पित करता है.

उससे वह प्रसन्न हो जाती हैं. यदि आप से संभव हो सके मां को सोलह श्रृंगार अर्पण करें.

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mata ke solah singar in Navratri rang
mata ke solah singar

सोलह श्रृंगार को लेकर ऋग्वेद में क्या कहा

नवरात्रि की इन 9 दिनों में mata ke solah singar माता के श्रृंगार के बाद घरेलू महिलाएं खुद भी सोलह श्रृंगार जरूर करें.

आपको बता दें, ऋग्वेद में भी सोलह श्रृंगार के बारे में काफी कुछ जिक्र किया गया है.

ऋग्वेद में यह लिखा है कि जिसके मुताबिक सोलह सिंगार सिर्फ खूबसूरती को भी बढ़ाता है.

बल्कि यह आपके भाग्य को भी बढ़ाता है.

इस कारण से नवरात्रि के दौरान माता के सोलह श्रृंगार का महत्व है.

ऐसा ही श्रृंगार घरेलू महिलाओं को भी करना चाहिए.

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Navratri maa durga shringar in important in rigveda
Navratri maa durga shringar in important in rigveda

माता के श्रृंगार में काम आने वाले सामान

नवरात्रि में मां के श्रृंगार के लिए लाल चुनरी, पायल, नेलपॉलिश, लिपस्टिक, चूड़ी, इत्र, सिंदूर, बिछिया, महावर, मेहंदी, काजल, चोटी, बिंद्दी,

गले के लिए माला या मंगल सूत्र, चोटी में लगाने वाला रिबन और कान की बाली जैसे सामान की आवश्यकता होती है.

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माता के श्रृंगार में वह चीजें शामिल होती है.

इनका उपयोग एक सुहागन स्त्री किया करती है.

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hindu women also accept solaha singhar like maa durga in Navratri
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श्रृंगार के लिए माता की स्थापना

अगर श्रृंगार करने के लिए पहले घर पर माता को बिठाना होता है.

इसके लिए एक चौकी उस पर पीला या लाल कलर का कपड़ा बिछा दे.

बाद में इसके ऊपर मां दुर्गा की मूर्ति रख दे.

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मां की मूर्ति पर कुमकुम का टीका लगाकर श्रृंगार के सभी सामानों को एक-एक करके अर्पण कर दें.

नवरात्रि के नो ही दिनो माता का अलग-अलग श्रृंगार करना चाहिए.

जैसे कि एक आम सुहागन स्त्री सजा करती है ठीक वैसे ही.

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Prakash Panwar

मैं एक फ्रीलॉंसर हिंदी कंटेंट राइटिंग करता है. मुझे टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट, पॉलिटिक्स और एजुकेशन जैसी बिट पर लिखना पसंद करता है. खाली समय में कंप्यूटर पढ़ना बहुत अच्छा लगता है. क्वालिफिकेशन की बात की जाये तो में बी-टेक कंप्यूटर साइंस से अध्यनरत हूँ.

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