12 जीवो में है आपके पितरो का वास इन्हे कभी नाराज मत करना

12 जीवो में है आपके पितरो का वास इन्हे कभी नाराज मत करना

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हमारे पितरों की शांति के लिए श्रद्धा से दान दिया जाता है। यह दान लोगों पशु पक्षी को भी किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि हमारे पितृ इन जीवो में विध्यमान रहते हैं। अगर आपने इनको भोजन कराये। तो समझ ले कि यह आपके पितृ को लग गया। क्या वास्तव में धर्म शास्त्रों में भी ऐसी मान्यता है। अगर ऐसी मान्यता है, तो Pitro ka vas पितरों का वास सृष्टि की बनाई हुई किन चीजों में होता है। तो चलिए जानते हैं, धार्मिक शास्त्र के अनुसार पितरों का वास किन चीजों में बताया है:

Pitro ka vas 12 जीवो में है आपके पितरो का वास

सबसे पहले यह जान लेते हैं कि हमारे पितरो की स्थिति शास्त्रों में कहां बताई गई हैं। तथा हमारे पितृ लोग कहाँ निवास करते हैं।

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क्या है पितृ लोक

धार्मिक शास्त्रों की माने तो हमारे पितरों का पित्र लोक चंद्रमा के उधर्व भाग में बताया गया है।

जबकि दूसरी ओर अग्निहोत्र कर्म के कारण आकाश मंडल में रहने वाले सभी पक्षी भी तृप्त होते हैं।

इसमें पक्षियों के लोक को भी पितृलोक कहा जाता है।

तीसरी मान्यता यह भी है कि कुछ पितृ वरुण देव का आश्रय रह भी लेते हैं।

जिस कारण पितरों की स्थिति जल में भी बतायी गयी है।

शास्त्रों में पितरों की शांति के लिए हमारी सृष्टि के बनाए हुए।

इन 9 चीजों को कभी नहीं भूलना चाहिए। जिसमें शामिल है तीन-तीन (वृक्ष पशु और पक्षी)।

vriksho me hamare pitra
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Pitro ka vas बरगद का पेड़

यदि आपके पितरों की मुक्ति नहीं हुई है। तो ऐसे में आपको बरगद के पेड़ की पूजा करनी चाहिए।

बरगद के पेड़ में साक्षात भगवान महेश यानी शिव का निवास बताया गया है।

पितरों की मुक्ति के लिए बरगद के पेड़ की पूजा शास्त्रों के हिसाब से भी अनिवार्य है।

पीपल का पेड़

पितृपक्ष में पीपल के पेड़ की पूजा बेहद ही पवित्र होती है।

क्योंकि पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का निवास होता है।

जिस कारण इस वृक्ष रूप को पितृ देव भी कहते हैं।

पितृपक्ष में पीपल के पेड़ की उपासना वह इसे लगाना (आरोपित करना) अत्यंत शुभ है।

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बेल के वृक्ष से पितृ शांति कैसे हो

अपने पितरों की शांति के लिए भगवान शिव की प्रिय कही जाने वाली।

बेल के वृक्ष को लगाने से पितरो की आत्मा को शांति मिलती है।

आपको अमावस्या के दिन भगवान शिवजी को बेलपत्र और गंगा जल अर्पित करना चाहिए।

जिससे आपके पितरों को मुक्ति मिलेगी।

बेल के वृक्ष के अलावा तुलसी, अशोक और शमी के वृक्षों की भी पूजा करनी चाहिए।

हंस मे वास Pitro ka vas

पक्षियों के अंदर हंस एक ऐसा पक्षी है। जिसके अंदर सभी देव की आत्मा है। यहाँ देवताओ की आत्माये बी आश्रय लेती है। कहा जाए तो यह उन आत्माओं का ठिकाना है। जिन्होंने अपने जीवन में अच्छे कर्म किए हो। कहने का मतलब जिन्होंने यम के नियम का पालन किया हो। कुछ समय तक आत्मा हंस योनि में रहकर के कुछ समय का इंतजार करती है। फिर पुनः मनुष्य की योनि में चली जाती है। जबकि कुछ देवलोक में चली जाती है। हो सकता है, आपके पितरो ने भी पुण्य कर्म किए हो।

pakshiyo me purvajo ka vaas
pakshiyo me purvajo ka vaas

कौवे में वास

श्राद के दिनों में आपने लोगों को कौवे को खाना खिलाते हुए देखा होगा। कौवा आपको अतिथि आगमन देने का संकेत और पितरों का आश्रम स्थल भी बताया गया है। श्राद्ध पक्ष में कौओ का अत्यधिक महत्व है। क्योंकि इस पक्ष में कौओ को भोजन कराना मतलब कि पितरों को भोजन कराने के बराबर है। हमारे शास्त्रों की मानें तो कोई भी क्षमतावान आत्मा कौवे के शरीर में स्थित होकर घूम फिर सकती है।

गरुण में वास

भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ जी हैं। जिस कारण से इनके नाम के ही आधार पर गरुण पुराण को रखा गया। जो श्राद कर्म,पितृ लोक, स्वर्ग, नरक आदि के बारे में विस्तार से उल्लेख करता है। इसके अलावा पक्षियों में भी गरुण को काफी पवित्र माना गया है।अगर आपने रामायण देखी होगी, तो भगवान राम को मेघनाथ के नागपाश से मुक्ति दिलाने का कार्य भी वरुण देव के द्वारा पूरा किया था। इनके अलावा क्रोच या सारस का नाम भी लिया जाता है।

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गाय की भूमिका

हमारे धर्म ग्रंथ में गया के अंदर सभी देवी देवताओं का निवास बताया गया है। ठीक उसी प्रकार से एकमात्र गे ही ऐसी जीव है। जिसमें सभी देवी देवताओं का निवास होता है। दरअसल शास्त्रों की मान्यता के मुताबिक 84 लाख योनियों का सफर करने के बाद आत्मा अंतिम योनि के रूप में गाय ही बनती है। केवल गाय ही लाखों योनियों का वह पड़ाव है। जहां आत्मा विश्राम करके आगे की यात्रा शुरू करती है।

janvaro me pitro ka vaas
janvaro me pitro ka vaas

कुत्ते में निवास Pitro ka vas

मानव का सबसे वफादार और चहेता जीव कुत्ते को माना गया है। ऐसा कहते भी हैं कि इसे ईधर माध्यम में की वस्तुएं भी नजर आ जाती है। मतलब कुत्ता है ऐसा प्राणी है। जो भविष्य में होने वाली घटनाओं और ईधर माध्यम यानि सूक्ष्म जगत की आत्माओं को देखने की काबिलियत रखता है। हिंदू देवता भैरव महाराज का सेवक जीव कुत्ता ही है। यदि आप कुत्ते को भोजन देते हैं। तो भैरव महाराज आपसे अवश्य ही प्रसन्न होते हैं। भगवान भैरव महाराज अचानक आने वाले संकटों से भक्तों की रक्षा करते हैं। यदि आप कुत्तों को रोटी देते हैं। तो आपके पितृओ की कृपा आप पर बनी रहेगी।

हाथी में वास

गज यानी हाथी जीव को हमारे धर्म में भगवान गणेश का साक्षात रूप बताया गया है। भगवान इंद्र देव का यह वाहन भी है। शास्त्र के अनुसार हाथी पूर्वजों का प्रतीक भी बताया गया है। ऐसे में जिस दिन किसी हाथी की मृत्यु हो जाती है। उस दिन कोई साथी भोजन नहीं करता है। हाथियों को अपने पूर्वजों की स्मृति भी रहती है। आश्विन मास की पूर्णिमा के दिन गज पूजा विधि को रखा जाता है। जहां सुख समृद्धि और इच्छा रखने वाले लोग हाथी की पूजा करते हैं। हाथी के स्थान पर वराह बैल और चीटियों का भी वर्णन मिलता है। यदि आप चींटी को आटा और छोटी छोटी चिड़िया को दाना देते हैं। आप भी वैकुंठ में जा सकते हैं।

मछली में निवास

जलचर जंतुओं में मछली भी एक प्रकार का जीव है। हिंदू मान्यताओं की माने तो भगवान विष्णु ने एक बार मछली का अवतार लेकर। मनुष्य जाति के अस्तित्व को जल के प्रलय से बचाया था। पितृ पक्ष में बनाए गए चावल के लड्डू जल में विसर्जित कर दिए जाते हैं।

कछुए मैं विराजमान

जल में निवास करने वाला कछुआ दीर्घायु का स्वामी होता है।

भगवान विष्णु ने कछुए का अवतार लेकर देव और देवताओं के लिए मदनाचल पर्वत को भी अपनी पीठ पर स्थापित कर लिया था।

हिंदू धर्म की मानें तो कछुआ बहुत ही पवित्र और उभचर जंतु है। जो जल की सभी गतिविधियों को जानता है।

jalchar jivo me hamare purvaj
jalchar jivo me hamare purvaj

नाग

हमारे धर्म ग्रंथों में नाग को देवता की उपाधि दी गई है। कि भारतीय संस्कृति में नाग की पूजा की जाती है।

यह एक रहस्यमई जंतु है, यह भी पितरों का प्रतीक बताया गया है।

नाग के अलावा मगरमच्छ को भी यह स्थान प्राप्त है।

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निष्कर्ष Pitro ka vas

हिंदू धर्म में एक बहुत बड़ा धर्म है। जिसमें प्रकृति में निवास करने वाले हर एक चीज को किसी ना किसी घटना से जोड़ा हुआ बताया है। ऐसे में पूर्व बताए गए जलचर जंतु पशु और पक्षी में पितरों के वास् को देखा गया है। मनुष्य योनि में जन्म लेने वाली आत्माओं के बारे में शास्त्रों में यही लिखा है। इन सभी की पूजा अर्चना करना आपके पितरों के लिए शुभ होगा। जिससे आपके पितरों की कृपा आप पर बनी रहेगी और सुख समृद्धि भी आएगी।

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