भारत के इसी स्थान पर गिरा था भगवान गणेश का एक दांत

It was at this place in India that the war of Lord Ganesha and Parasurama
 
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इतिहास की बात अगर करें तो यह किसी से छिपा नही है। किसी न किसी तरह से यह हमारे सामने आता है। आज हम आपसे एक ऐसे ही ऐतिहासिक मंदिर के बारे में चर्चा करने वाले हैं, जो पूरी तरह से भगवान गणेश जी को समर्पित है। यह मंदिर साफ तौर से भगवान गणेश के इतिहास को उजागर करता है।

दरअसल यह मंदिर इसलिए फैमस है क्योंकि यहां पर भगवान गणेश का एक दांत टूटा था। यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से जितना महत्व रखता है उससे ज्यादा यह प्रदर्शनी के रूप में भी आकर्षित दिखता है। चारो ओर प्राकृति से सराबोर यह मंदिर दर्शकों का गण बना हुआ है। तो चलिए जानते हैं इस मंदिर के बारे में विस्तार से….

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भगवान गणेश के मंदिर का महत्व

Importance of temple of Lord Ganesha
Importance of temple of Lord Ganesha

वैसे तो भगवान गणेश जी के कई मंदिर है लेकिन इस मंदिर की बात ही कुछ ओर है।

यह मंदिर प्रकृति की गोद में बसा है। छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा जिला से लगभग 30 कि.मी. की दूरी,

पर ढोलकल की पहाड़ियों पर 3000 फीट ऊंचाई पर स्थित है। इतनी ऊंचाई पर स्थापित ये प्रतिमा आश्चर्य का विषय है।

यहां पर पहुंचना इतना आसान नहीं है। इस मंदिर को लेकर पुरात्वविदों का मानना है,

कि 10वीं शताब्दी में नागवंशियों ने गणेश जी की यह प्रतिमा दंतेवाड़ा स्थान की रक्षा के लिए स्थापित की थी।

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भगवान गणेश की यह प्रतिमा इसलिए की गई थी स्थापित

This statue of Lord Ganesha was established
This statue of Lord Ganesha was established

गणेश जी की ग्रेनाइट पत्थर से बनी इस प्रतिमा की ऊंचाई 6 फीट और चैड़ाई 21 फीट है।

प्राकृतिक और वास्तुकला दोनो ही दृष्टि से यह मूर्ति काफी सुन्दर प्रतीत होती है।

इस प्रतिमा के दाहिने हाथ में फरसा और बाएं में टूटा हुआ एक दांत है।

दूसरी ओर नीचे वाले दाहिने हाथ में अभय मुद्रा में अक्षमाला एवं बाएं में मोदक है।

पुरात्वविदों के अनुसार ऐसी प्रतिमा बस्तर इलाके में कहीं नहीं मिलती।

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भगवान गणेश और परशुराम का हुआ था युध्द

The war was done by Lord Ganesha and Parashuram
The war was done by Lord Ganesha and Parashuram

खास बात यह है कि इस मंदिर के पास एक कैलाश गुफा भी स्थित है। लोगो की ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश और परशुराम जी का युध्द इसी स्थान पर हुआ था। और इसी युध्द में भगवान गणेश जी का एक दांत टूट गया था तभी से वह एकदंत कहलाए। दंतेवाड़ा से ढोलकल की ओर जाते हुए रास्ते में एक ग्राम परस पाल की प्राप्ति होती है जिसे परशुराम के नाम से जानते हैं। इसके बाद ग्राम कोतवाल पारा आता है। कोतवाल का अर्थ रक्षक होता है। दंतेश के इलाके को दंतेवाड़ा कहते हैं।

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Ramgovind kabiriya
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मैं रामगोविन्द कबीरिया मुझे लिखने का काफी शौक है, मैं कन्टेन्ट राइटिंग में पिछले तीन सालों से काम कर रहा हूॅं। मैंने इन्दौर के डीएवीवी यूनिवर्सटी से एम.ए. मासकम्युनिकेशन किया है। इसके अलावा मैंने कम्प्युटर के क्षेत्र से सम्बधित पीजीडीसीए भी किया है। मैं न्यूज़, फैशन, धर्म, लाईफस्टाइल, वायरल स्पाॅर्टस आदि सभी कैटेगिरी में लिखता हूॅं।

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