इस वेश्या का महात्मा बुद्ध ने किया था ऐसा उद्धार की बन गई बुद्ध भिक्षुणी

इस वेश्या का महात्मा बुद्ध ने किया था ऐसा उद्धार की बन गई बुद्ध भिक्षुणी

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भारत के इतिहास में ऐसी कई घटनाएं है जिनके विषय में जानने के लिए सभी व्यक्ति के मन में हमेशा उत्सुकता बनी रहती है ऐसी ही एक घटना आम्रपाली कि है जिसने साधारण स्त्री से वेश्या बनने का सफ़र तय किया तथा एक वेश्या से वह एक बौद्ध भिक्षुणी बन गई. आइये जानते है कि आम्रपाली कौन थी और किस प्रकार उसे एक वेश्या बनना पड़ा.

आम्रपाली का परिचय

Amrapali
Amrapali

आम्रपाली के जन्म के विषय में किसी को कुछ ज्ञात नहीं है ऐसा कहा जाता है कि

वह एक आम के वृक्ष के नीचे पाई गई थी इसी कारण से उसका नाम आम्रपाली रख दिया गया.

आम्रपाली देखने में बहुत ही सुन्दर थी और उसके चेहरे पर एक अजीब सा आकर्षण था

जिसके कारण जो भी व्यक्ति उसे एक बार देखता उसकी नजर उसके चेहरे पर ही जम जाती.

आम्रपाली कि युवावस्था

 

जब आम्रपाली ने अपनी युवावस्था में कदम रखा तब उसकी सुन्दरता कि कोई सीमा नहीं थी

जो भी पुरुष उसे देखता वह उससे विवाह करने के लिए बैचेन हो जाता यही कारण था कि

वैशाली राज्य के सभी पुरुष उससे विवाह करना चाहते थे और उसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार थे.

जिसकी वजह से आम्रपाली के माता-पिता बहुत चिंतित रहते थे वह जानते थे कि यदि आम्रपाली का

विवाह किसी से कर दिया तो बाकी के सभी उनके दुश्मन बन जायेंगे. इस समस्या को लेकर वह राज्य कि सभा में पहुंचे.

सभा का निर्णय

 

जब आम्रपाली के विवाह का मामला वैशाली राज्य कि सभा में पहुंचा तो वहां उपस्थित सभी

पुरुष उससे विवाह करने के लिए तैयार थे कोई भी उसे खोना नहीं चाहता था बहुत समय विवाद

होने के बाद अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आम्रपाली को नगरवधू ( वेश्या ) घोषित कर दिया गया.

बुद्ध का आम्रपाली से मिलना

Mahatma budh

 

एक बार गौतम बुद्ध का आगमन वैशाली राज्य में हुआ तब उनके शिष्य धम्म ने भिक्षा मांगने

के उद्देश्य से आम्रपाली के महल में प्रवेश किया जब आम्रपाली ने धम्म को देखा तो वह उससे प्रेम करने लगी.

और कहा कि वर्षाकाल के समय आप मेरे महल में निवास कर सकते है. किन्तु धम्म ने अपने गुरु बुद्ध

कि आज्ञा लेना उचित समझा. गुरु बुद्ध ने भी उसे वहां रहने कि आज्ञा प्रदान कर दी.

Buddha
Buddha

चार माह धम्म आम्रपाली के महल में रहा और आम्रपाली उसे अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करती रही

लेकिन धम्म पर उसकी सुन्दरता व आकर्षण का कोई प्रभाव नहीं पड़ा. जब वर्षाकाल समाप्त हो गया

तब धम्म वापस बुद्ध के पास लौटने लगा तब आम्रपाली भी उसके साथ थी वहां पहुंचकर आम्रपाली ने बुद्ध

से कहा कि मेरी इस सुन्दरता के सभी दीवाने है किन्तु आपके शिष्य पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा

मेरे सारे प्रयास विफल रहे में भी आपकी शरण में रहना चाहती हूँ. और उसी समय से आम्रपाली सब कुछ छोड़ बुद्ध भिक्षुणी बन गई.

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