vastu dosh: वास्तु दोष क्या है तो ऐसे होगी पैसों में बरकत और दुखो का उपाय

Prakash Panwar
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वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि सब कुछ ठीक है। तो घर में खुशहाली और सुख-शांति बनी रहती है। लेकिन अगर घर में वास्तु दोष पाया गया। तो व्यक्ति गलत मार्ग की ओर अग्रसर होने लगता है। तो चलिए vastu dosh हम आज आपको वास्तु की दृष्टि से हर दिशा का अपना महत्व बता देते है। जिसके साथ-साथ वास्तु दोष के बारे में भी आपको जानने के बारे में मिलेगा:

क्या है वास्तु दोष vastu dosh

जैसा कि आपको पता है। वास्तु शास्त्र के अंदर दिशाओं का महत्व काफी माना गया है। शास्त्र भी यह कहता है कि हर दिशा में किसी ना किसी देवताओं का वास होता है। अगर सभी दिशाओं के स्वामी प्रसन्न होंगे। तो आपके घर में खुशियां ही खुशियां होगी। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ। तो गृह दोष होने की स्थिति मैं आपकी संतान (बेटा या बेटी) अपना रास्ता भटक सकते हैं। कुछ गलत फैसले लेकर अपना जीवन भी बर्बाद कर सकते हैं। यहां तक की घर से भाग जाने का साहस भी उठा सकते हैं। ऐसा शायद इसलिए भी होता है। कि वास्तु दोष सबसे पहले आपके मन और दिल को प्रभावित कर बुद्धि भ्रष्ट कर देता है।

pur disha me surya dev ka vaas hai
pur disha me surya dev ka vaas hai

वास्तु के हिसाब से घर के दिशाओं का महत्व

घर में अलग-अलग दिशाओं को वास्तु के हिसाब से किस प्रकार से देखा जाता है। इस बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं। जिसमें आपको यह जानने का मौका मिलेगा कि किस दिशा का स्वामी कौन है। इसके साथ साथ आप उस दिशा के स्वामी को प्रसन्न करने के तरीके के बारे में भी जानेगे।

पूर्व दिशा vastu dosh

आपको बता दें, पूर्व की दिशा सूर्य प्रधान होती है। जिस प्रकार सूर्य सभी देशों में एक दिशा में निकलता है। क्योंकि सूर्य के उगने की दिशा पूर्व होती है। इस कारण से सूर्य पूर्व दिशा का स्वामी बताया गया है।

प्रभाव: जिसके कारण पूर्व दिशा ज्ञान, प्रकाश और अध्यात्म की प्राप्ति में व्यक्ति को काफी मदद मिलती है।

  • पूर्व दिशा में पिता का स्थान होता है।
  • यदि पूर्व दिशा बंद कि गयी हो तो गृहस्वामी पर कष्टों का घेरा आ जाता है।
  • शास्त्र भी यही बताते हैं कि घर बनते समय ध्यान रखकर पूर्व दिशा को खुला छोड़ना ही उचित है।
vastu dosh me dakshin disha ke dev yam hai
vastu dosh me dakshin disha ke dev yam hai

दक्षिण दिशा

दिशा दक्षिण यम की दिशा बतायी है। यम बुराई का नाश करने वाले देव हैं। जो पापों से छुटकारा भी दिलाते हैं। इस दिशा में पिक्चर भी वास करते हैं। वैसे यह दिशा सुख-समृद्धि और अन्य का स्त्रोत बतायी गयी है।

प्रभाव:

  • ऐसे में दिशा दूषित होने के कारण गृह स्वामी का विकास रुक जाता है।
  • इस दिशा का ग्रह मंगल है और मंगल एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रह है।

उत्तर दिशा

इस दिशा को मातृ स्थान और कुबेर की दिशा भी कहां गया है। जिससे इस दिशा का स्वामी बुध ग्रह है।

प्रभाव:

  • यदि उत्तर में खाली स्थान नहीं है।
  • तो माता को कष्ट आने की संभावना बढ़ जाती है।
dhan sambandhi dosh ke liye kuber devta
dhan sambandhi dosh ke liye kuber devta

दक्षिण और पूर्व की दिशा

इसी सिलसिले में दक्षिण पूर्व दिशा के स्वामी अग्नि देवता है। यह देवता व्यक्ति को तेजस्वी सुंदर और आकर्षक बनाते हैं। जीवन में सभी सुख भी प्रदान करते हैं।

प्रभाव: ऐसी स्थिति में जीवन में खुशी और स्वास्थ्य बना रहने के लिए आप एक उपाय कर सकते है।

  • इस दिशा में आप आग, भोजन पकाने तथा भोजन संबंधित कार्य कर सकते हैं।
  • दक्षिण पूर्व दिशा के अधिष्ठता शुक्र ग्रह है।
ghar me dakshin pashchim disha me bhagwan agni dev rahte hai
ghar me dakshin pashchim disha me bhagwan agni dev rahte hai

दक्षिण पश्चिम दिशा

वैसे यह दिशा मृत्यु की है। जिस कारण से यहां पिशाच का वास होता है इस दिशा का ग्रह राहु है।

प्रभाव: इस दिशा में दोष होने की स्थिति पर परिवार में असमय मौत की आशंका बनी रहती है।

उत्तर पूर्व दिशा vastu dosh

यह दिशा सोम और शिव के लिए जनि जाती है। जो जन स्वास्थ्य और ऐश्वर्य देने वाली है। यह दिशा वंश में वृद्धि कर उसे स्थायित्व भी प्रदान करती है।

प्रभाव: जिसके चलते उत्तर पूर्व दिशा में पुरुष व पुत्र संतान को भी उत्तम स्वास्थ्य प्रदान होता है।

  • इसमें धन प्राप्ति का स्त्रोत भी है।
  • इसलिए इसकी पवित्रता का आप हमेशा ख्याल रखें।
uttar purv disha vastu dosh ke liye shiv ki puja
uttar purv disha vastu dosh ke liye shiv ki puja

पश्चिम दिशा

दिशाओं के इस क्रम में इस दिशा का स्थान वरुण का है। जो सफलता, यश और भव्यता का आधार है। इस दिशा के ग्रह शनि को बताया गया है।

प्रभाव: आप लक्ष्मी से संबंधित पूजा पश्चिम की तरफ मुंह करके भी कर सकते हैं।

  • ठीक इसी प्रकार सभी दिशाओं के स्वामी अलग-अलग रहते हैं।
  • उनका जीवन में अलग-अलग प्रभाव है।
  • ऐसा स्थिति के अनुसार मनुष्य के जीवन पर भी पड़ता है।
urun dev ghar ki paschim desh me virajman hai
urun dev ghar ki paschim desh me virajman hai

उत्तर पश्चिम दिशा

यह वायु की दिशा है। जो शक्ति, पुराण और स्वास्थ्य प्रदान करने वाली है।

प्रभाव:

  • इस दिशा को मित्रता और शत्रुता का आधार भी बताया है।
  • :उत्तर पश्चिम दिशा का स्वामी ग्रह चंद्रमा है।

कैसे होगा वास्तु दोष के सभी दोषों का निवारण

बेहद ही कम लोग जानते हैं कि वास्तु पुरुष की प्रार्थना के बाद ब्रह्माजी ने वास्तुशास्त्र के नियमों की रचना की थी। जिनकी अनदेखी के कारण उपयोगकर्ता की शारीरिक मानसिक आर्थिक हानि होना रहता है। ऐसे में वास्तु देवता की संतुष्टि केवल गणेश जी की आराधना के बिना अकल्पनीय है। बाबा गणपति जी का वंदन कर वास्तु दोषों को शांत किया जाने में किसी प्रकार का संदेह नहीं है। vastu dosh ऐसे में आप नियमित रूप से गणेशजी की आराधना से वास्तु दोष उत्पन्न होने वाली संभावना को बेहद ही कम कर सकते हैं।

भविष्य में इस टॉपिक पर आने वाले कुछ प्रमुख बिन्दु

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Prakash Panwar
Prakash Panwar
मैं एक फ्रीलॉंसर हिंदी कंटेंट राइटिंग करता है. मुझे टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट, पॉलिटिक्स और एजुकेशन जैसी बिट पर लिखना पसंद करता है. खाली समय में कंप्यूटर पढ़ना बहुत अच्छा लगता है. क्वालिफिकेशन की बात की जाये तो में बी-टेक कंप्यूटर साइंस से अध्यनरत हूँ.

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