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वास्तुशास्त्र के इस इतिहास को आज तक कोई नहीं जान पाया

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vastu shastra in hindi आप लोगो को जब कोई भी दोष ख़त्म करना होता है तो आप वास्तुशास्त्र का इस्तेमाल करते है जिससे कि आप उन सारे दोषो से बच सके. लेकिन आपने कभी ये सोंचा है कि ये वास्तुशास्त्र है क्या इसकी उत्पत्ति कहाँ से हुई है, तो चलिए जानते है वास्तुशास्त्र के बारे में:

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Vastu shastra in hindi

Vastushastra
Vastushastra

वास्तु:- प्रथ्वी, जल, आकाश, वायु और अग्नि इन पांचो तत्वों से मिलकर वास्तु बना है.

इन्ही पांचो तत्वों के मिश्रण से बायो इलेक्ट्रिक मैग्नेटिक एनर्जी कि उत्पत्ति हुई है.

जिससे कि मनुष्यों कि समस्याओं का निवारण हो पाता है.

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महाभारत काल में वास्तु शास्त्र

Mahabharat
Mahabharat

आज से पांच हज़ार वर्ष पूर्व महाभारत काल में वास्तु शास्त्र बिलकुल विकसित अवस्था में था.

उस समय ज्ञानी लोगो को छोड़कर वास्तु को लोग जानते नहीं थे.

काल में एक मय नामक असुर था जो कि शास्त्र से बिलकुल परिपूर्ण था.

उस असुर ने मय महात्म्य नमक विलक्षण ग्रन्थ कि रचना कि थी जो आज भी उपलब्ध है.

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द्वापरयुग में वास्तुशास्त्र

Lord shri krishn
Lord shri krishn

द्वापरयुग में वास्तुशास्त्र का ज्ञाता विशकर्मा ने सुवर्णमय द्वारका नगरी का निर्माण किया था जिसे श्री कृष्ण कि नगरी के नाम से भी जाना जाता है यहाँ सुदामा और श्रीकृष्ण का मिलन हुआ था, यह स्वर्णमय नगरी श्रीकृष्ण कि इच्छा से समुद्र में विद्यमान हो गयी थी, क्योंकि श्रीकृष्ण का कहना था कलयुग में लोग स्वर्ण के पीछे एक दुसरे को मारने के लिए तैयार रहेंगे इसलिए उन्होंने सोने कि नगरी को समुद्र में ही लुप्त कर दिया.

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त्रेतायुग में वास्तुशास्त्र

Lord ram time vastu shastra in hindi
Lord ram time vastu shastra in hindi

vastu shastra in hindi त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने कई बार वास्तुविज्ञान का प्रयोग किया है इस काल में रावण ने श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वरम नामक सुप्रसिद्ध ज्योतिलिंग कि वास्तु प्रतिष्ठा जताई थी. पुराणों के अनुसार भगवान शंकर ने अपने मानसिक संकल्प द्वारा निर्मित सुवर्णमयी नगरी की प्रतिष्ठा भी महाविद्वान रावण से कराई थी जो बाद में उन्होंने दक्षिणा के रूप में रावण को समर्पित कर दी थी, वह सुवर्णमयी लंका कालान्तर में समुद्र में लोप हो गई है. अनेक पुराणों में वास्तुशास्त्र के सिद्धान्तों पर चर्चा है वेदों में वास्तुशांति के अनेक मंत्र मिलते है, अत: जितने वेद प्राचीन हैं, अनादि हैं, उतना ही वास्तुशास्त्र प्राचीन है अनादि है, अन्नत है.

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Ramgovind kabiriya

मैं रामगोविन्द कबीरिया मुझे लिखने का काफी शौक है, मैं कन्टेन्ट राइटिंग में पिछले तीन सालों से काम कर रहा हूॅं। मैंने इन्दौर के डीएवीवी यूनिवर्सटी से एम.ए. मासकम्युनिकेशन किया है। इसके अलावा मैंने कम्प्युटर के क्षेत्र से सम्बधित पीजीडीसीए भी किया है। मैं न्यूज़, फैशन, धर्म, लाईफस्टाइल, वायरल स्पाॅर्टस आदि सभी कैटेगिरी में लिखता हूॅं।

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